डीएसबी परिसर में प्राध्यापकों की हुई एक आवश्यक बैठक, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हुई व्यापक चर्चा

नैनीताल। डीएसबी परिसर में आज प्राध्यापकों की एक आवश्यक बैठक हुई जिसमें विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर व्यापक चर्चा हुई । बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय की स्थापना 1973 में हुई तथा तब से ही विश्वविद्यालय के शिक्षक , विद्यार्थियों ने स्वायत्तता के कारण ही पदम भूषण ,पद्मश्री , एफ एन ए ,एफ एन ए एससी ,एफ आर एस सी , एफ आर एस बी जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों को जीता तथा देश के साथ जनता के लिए कार्य किया । विश्वविद्यालय एक्ट तथा स्टेट् टूट्स से चलते है । विश्वविद्यालय को स्वायत्तता बेहतर ज्ञान के सृजन , तथा मानव संसाधन निर्माण के लिए दी गई । विश्वविद्यालय प्राध्यापक बायोमेट्रिक से उपस्थिति में असहयोग करेंगे जो नियम अनुकूल नहीं है । प्राध्यापकों ने कहा कि किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में यह व्यवस्था लागू नहीं है तथा ऐसे नियमों को थोपने का विरोध करते है । प्राध्यापकों का यह भी कहना था कि हर 6 माह में संविदा का सेवा विस्तार शासन द्वारा किया जा रहा है जो व्यहारिक नहीं है । प्रो एल एम जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनी रहनी चाहिए । प्रोफेसर एम सी जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय की आत्मा है स्वायत्तता । बैठक का संचालन अध्यक्ष प्रो ललित तिवारी ने किया । बैठक में प्रो चित्रा पांडे , प्रोफेसर सावित्री कैडा ,प्रो ज्योति जोशी ,प्रो लता पांडे आदि ने विचार रखे । बैठक में यह तय हुआ कि प्राध्यापकों की उपस्थित धारित नियम से ही हो । इस संदर्भ में कुलाधिपति, मुख्यमंत्री ,शिक्षा मंत्री ,संसाद ,विधायक ,कुलपति ,कुलसचिव ,निदेशक को ज्ञापन भेजा गया है कि विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनी रहे जिससे ज्ञान का सृजन होता रहे । मोबाइल की उपयोग से बायोमेट्रिक उपयोग से डेटा की सेफ्टी पर भी चर्चा हुई । बैठक में बड़ी संख्या में प्राध्यापक उपस्थित रहे । बैठक में प्रो सूची बिष्ट ,डॉ गिरीश चंद्र ,डॉ प्रकाश चन्याल ,प्रो नीलू लोधियाल ,महासचिव प्रोफेसर युगल जोशी ,डॉ दीपक कुमार ,डॉ शिवांगी ,डॉ कुबेर गिनती ,डॉ अशोक कुमार ,डॉ रवि जोशी ,प्रो आशीष तिवारी ,प्रो संजय घिल्डियाल ,प्रो आशीष मेहता ,डॉ हिमांशु लोहनी आदि शामिल रहे । बैठक में तय हुए कि विश्वविद्यालय बचाओ आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा ।








