मजहब की दीवारों से ऊपर उठा राखी का रिश्ता, संध्या शर्मा ने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर बांधी राखी,रक्षाबंधन पर दिया सामाजिक सौहार्द, एकता और भाईचारे का संदेश

नैनीताल]। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उस समय सौहार्द और भाईचारे की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली, जब संध्या शर्मा ने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर आपसी प्रेम और सामाजिक एकता का संदेश दिया। इस पहल के माध्यम से उन्होंने समाज में धर्म और मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत के रिश्ते को मजबूत करने का संदेश दिया।
राखी बांधते समय संध्या शर्मा ने मुस्लिम भाइयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और उनके सुख-समृद्धि की कामना की। मुस्लिम भाइयों ने भी बहन के इस स्नेह को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए उनके प्रति अपना स्नेह और आशीर्वाद व्यक्त किया।
इस अवसर पर संध्या शर्मा ने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक है। राखी का धागा किसी धर्म की सीमा में बंधा नहीं होता। यह दिलों को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान हमेशा से अनेकता में एकता और आपसी भाईचारे की रही है। अलग-अलग धर्म, भाषा और संस्कृति के बावजूद हम सभी एक-दूसरे के त्योहारों और खुशियों में सहभागी बनें, यही सामाजिक सद्भाव की वास्तविक भावना है।
उन्होंने कहा, “हमारे बीच भले ही पूजा-पद्धतियां अलग हों, लेकिन इंसानियत, प्रेम और भाईचारा हम सबको एक सूत्र में बांधता है। राखी का यह छोटा सा धागा समाज में बड़े प्रेम और एकता का संदेश दे सकता है।”
रक्षाबंधन के अवसर पर संध्या शर्मा की इस पहल की लोगों ने सराहना की। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब रिश्ते दिल से बनते हैं तो मजहब की सीमाएं छोटी पड़ जाती हैं और भाईचारा सबसे बड़ा रिश्ता बन जाता है।














