31 August 2025

समाज में नशे और बेरोजगारी के खिलाफ जनआंदोलन का ऐलानराज्य आंदोलन कारी लीला बोरा नशे के खिलाफ लड़ेंगी जंग

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नैनीताल। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की एक आनलाइन बैठक आयोजित हुई। जिसमें दो और तीन फरवरी को केंद्र में प्रस्तावित आंदोलन की रूपरेखा के लिए विचार विमर्श किया गया।
राज्य आंदोलनकारी लीला बोरा ने बताया कि ऑनलाइन बैठक में 41वर्ष पूर्व नशा नहीं, रोजगार दो, काम का अधिकार दो के खिलाफ आंदोलन के लिए आगामी 2-3 फरवरी को प्रस्तावित आयोजन के केंद्र में विस्तृत से विचार-विमर्श किया गया।

ऑनलाइन बैठक में सभी प्रतिभागियो द्वारा समाज में बढते सभी प्रकार के नशे और बेरोज़गारी के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
वक्ताओं द्वारा तथ्यात्मक आंकड़े सहित कहा गया कि जहाँ एक ओर लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रोजगार की कमी और बढ़ती व्यापक आर्थिक असमानता के कारण आम युवा भी नशे के शिकार हो रहे हैं। दूसरी ओर सरकार कदम-कदम पर शराब की दुकानें खोल कर घर-घर तक शराब पंहुचाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।‌
अधिकांशतया, देश के छात्र-नौजवान इनका शिकार बन रहे हैं। जबकि, आज़ आवश्यकता उनको नशा नहीं, रोजगार देने की है। साथ ही, काम का अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किये जाने की जरूरत है।
भारत में रोजगार की स्थिति पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने विश्व बैंक के हवाले से बढती बेरोजगारी दर (7.2%) पर चिंता प्रकट की गई। 50% से अधिक युवा बेरोजगार हैं (स्रोत: यूएनडीपी)। रोजगार की कमी के कारण 30% से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं (स्रोत: विश्व बैंक)।
नशे के प्रभाव पर चिंता प्रकट करते हुए बताया कि नशे के कारण भारत में हर साल 2 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। (स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन)
नशे के कारण ही देश में में 50% से अधिक घरेलू हिंसा की घटनाएं होती हैं (स्रोत: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण)। नशे के कारण भारत में 30% से अधिक लोगों की सेहत खराब होती है। (स्रोत: विश्व स्वास्थ्य संगठन)

रोजगार एक बुनियादी जरूरत है, इससे लोगों को आत्मसम्मान और आत्मविश्वास मिलता है, लोगों को अपने परिवार का पालन-पोषण करने का अवसर मिलता है, रोजगार से लोगों को समाज में एक सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलता है।
हमारा देश बड़ी जनसंख्या वाला और श्रम प्रधान देश है। लेकिन मुनाफा खोरी के लिए कीमत कम करने के नाम पर रोजगार के हर क्षेत्र में गंभीर कटौती की जा रही है। जो थोड़े से अवसर हैं वे भ्रष्टाचार की भेंट चढ रहे हैं, अधिकारियों, राजनेताओं के बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।बेरोजगारी एक विकराल सामाजिक समस्या बन गई है, जिसका समाधान आवश्यक है। रोजगार नीतियों की पुनर्समीक्षा और नई जनोन्मुखी रोजगार नीति बनाने की भी जरूरत है।

इसी कारण इन सब समस्याओं से निजात पाने के लिए एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने की आवश्यकता है। बैठक में निर्णय लिया गया कि-
1.जन जागरूकता के लिए अभियान के तहत एक पांच सदस्यीय समिति, जिसके सदस्य सर्वश्री चारू तिवारी, डॉ. हेमा जोशी, त्रिलोचन भट्ट, हीरा जंगपांगी और डॉ. अरुण कुकसाल होंगे, यह समिति एक ड्राफ्ट तैयार करेंगे, जिसे जनता के बीच प्रसारित किया जाएगा। सोशल मीडिया में भी अभियान चलाया जाएगा। जन गीत, नुक्कड़ नाटकों, पर्चे के माध्यम से संदेश दिया जाएगा। 2. दिनांक 30 जनवरी को महात्मा गॉंधी की पुण्यतिथि के अवसर पर अल्मोड़ा में नंदादेवी परिसर में एक खुली सभा का आयोजन कर चर्चा की जाएगी। 3. तत्पश्चात बसभीड़ा, चौखुटिया, देहरादून सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शन, रैली एवं गोष्ठियों के माध्यम से इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा। 4. दिनांक 02 फरवरी को सभी जनपद मुख्यालयों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया जाएगा। 5. आंदोलन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अन्य सामाजिक/राजनीतिक संगठनों, समाज के प्रबुद्ध वर्ग, प्रगतिशील महिला संगठनों, छात्र-नौजवानों को भी सम्मिलित करने के प्रयास किये जाएंगे। 6. इसके लिए चर्चा एवं सूचनाओं के आदान- प्रदान हेतु एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा। 7. समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
उक्त बैठक की अध्यक्षता नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन में निरंतर सक्रिय रहे उपपा के पीसी तिवारी ने की, विचार-विमर्श में पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, सामाजिक चिंतक पत्रकार चारू तिवारी, समाज विज्ञानी डॉ. अरुण कुकसाल, उत्तराखण्ड महिला मंच से राज्य आंदोलनकारी कमला पंत, उधमसिंह नगर से सामाजिक कार्यकर्ता हीरा जंगपागी, हल्द्वानी से डाॅ. हेमा जोशी, नैनीताल से ट्रेड यूनियन लीडर लीला बोरा, देहरादून से एडवोकेट राजकुमार त्यागी, नैनीताल से हाइकोर्ट एडवोकेट और पर्यावरण एक्टिविस्ट स्निग्धता, चेतना आन्दोलन से विनोद बडोनी, नशामुक्ति और पुनर्वास के लिए काम कर रहे संगठन निर्मल दर्शन से संकल्प, दिल्ली से हरेन्द्र कुमार अवस्थी, अल्मोड़ा से किरन आर्या, आनंदी वर्मा, गोपेश्वर से विनीता कठैत, अल्मोड़ा से भावना पांडे, भारती, विनीता, पंकज, कमल सिंह, आंचल, प्रांजल कुंजवाल, विनोद कुमार विष्ट, मयंक, गिरधारी कांडपाल, एडवोकेट गोपाल राम, एडवोकेट धीरेन्द्र मोहन पंत, मोहन सिंह आदि द्वारा अपने विचार व्यक्त किये गये। बैठक का संचालन पौड़ी से नरेश चन्द्र नौड़ियाल द्वारा किया गया।

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