अल्मोड़ा में साहित्यिक उत्सव की तैयारियां शुरू, 30 अक्टूबर से सजेगा ‘मल्ला महल नॉर्थ’ में साहित्य और संस्कृति का मंच

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकभाषा, साहित्य और कला को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अल्मोड़ा में साहित्यिक उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक ‘मल्ला महल नॉर्थ’ में तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। उत्सव में साहित्यकारों, कवियों, कहानीकारों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के बीच संवाद होगा। कार्यक्रम में कुमाऊं की लोकसंस्कृति, हिंदी भाषा, अंग्रेजी साहित्य, इतिहास, पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण और पहाड़ों की सामाजिक चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्टूबर को कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित होने वाले ओपन माइक सत्र से होगी, जिसकी मेजबानी गायत्री जोशी करेंगी। इसके बाद कुमाऊंनी साहित्य और उसकी समृद्ध परंपरा पर चर्चा होगी, जिसमें हयात सिंह रावत, दीवा भट्ट और देव सिंह पोखरिया, गीता खोलिया के साथ संवाद करेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में कहानियों और शब्दों की भूमिका पर भी विमर्श होगा। शाम को उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से जुड़े सत्र आयोजित किए जाएंगे।
महोत्सव के दूसरे दिन 31 अक्टूबर को कहानी-कथन, पर्यावरण, बाल साहित्य, महिला सशक्तीकरण, आध्यात्मिकता और पर्वतीय पर्यटन जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। ‘पहाड़, इश्क और ध्रुव तारा’ के माध्यम से कहानी-कथन की प्रस्तुति होगी। वहीं, हिमालयी पर्यावरण के सामने मौजूद चुनौतियों, संरक्षण और पुनरुद्धार पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। चीनी और मसालों से आगे खानपान की विविधता, महिलाओं की बदलती भूमिका तथा उत्तराखंड हिमालय में पवित्र स्थलों के अनुभवों पर भी संवाद होगा। इसके अलावा पर्वतीय रोमांच और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।
महोत्सव के तीसरे दिन 1 नवंबर को हिंदी भाषा एवं साहित्य, कुमाऊं के इतिहास, नागा रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास, पहाड़ी क्षेत्रों में उद्यमिता और पर्यावरण जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। ‘बदलती हुई हिंदी’ के जरिए भाषा के बदलते स्वरूप पर चर्चा होगी। वहीं, ‘एंटरप्राइज फॉर टैकलिंग माइग्रेशन इन हिल्स’ विषय के अंतर्गत पहाड़ों से पलायन की समस्या और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं पर विचार साझा किए जाएंगे। अंग्रेजी कविता, कहानी-कथन और हिंदी कविता से जुड़े सत्र भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
तीन दिवसीय यह साहित्यिक महोत्सव अल्मोड़ा की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा देने के साथ ही विभिन्न भाषाओं और विचारधाराओं के बीच संवाद का अवसर प्रदान करेगा। स्थानीय साहित्य, पहाड़ी जीवन, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए रोजगार जैसे मुद्दों को मंच मिलने से महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान और समकालीन चुनौतियों को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।























