शिक्षक दिवस पर गणित के प्राध्यापक का संदेश – अनुभव से बड़ा कोई शिक्षक नहीं

नैनीताल l शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में एक प्राध्यापक ने शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बारिश का अर्थ तभी है जब उसे ग्रहण करने वाली धरती हो, ठीक वैसे ही शिक्षक के ज्ञान की सार्थकता विद्यार्थी से है। विद्यार्थी ही शिक्षक के अस्तित्व को अर्थ देता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक बीज की तरह है और विद्यार्थी धरती की तरह जो उसे पनपने का अवसर देता है। इसलिए शिक्षक दिवस पर धन्यवाद केवल शिक्षक को नहीं, उन विद्यार्थियों को भी है जिन्होंने शिक्षक बनने का अवसर दिया।
प्राध्यापक ने कहा कि जीवन के अनुभवों से बड़ा कोई शिक्षक नहीं है। किताबें ज्ञान देती हैं, शिक्षक दिशा देते हैं, लेकिन अनुभव स्वयं को समझना सिखाते हैं। गौतम बुद्ध के ‘अप्प दीपो भव’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब बाहर का प्रकाश साथ छोड़ दे, तब अनुभवों का प्रकाश ही रास्ता दिखाता है। हर घटना, हर सफलता-असफलता और हर गलती एक किताब का पन्ना है।
गणित को जीवन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि गणित केवल संख्याओं और समीकरणों का विषय नहीं, बल्कि जीवन को देखने की दृष्टि है। यह सिखाता है कि हर समस्या का समाधान होता है, बस दृष्टिकोण, धैर्य और प्रयास की जरूरत है। ज्यामिति के कोण की तरह दृष्टिकोण बदलते ही दिशा बदल जाती है, और टोपोलॉजी की तरह बाहर से अलग दिखने वाले लोगों में भी भीतर समान भावनाएं और सपने होते हैं।
उन्होंने कहा कि AI और टेक्नोलॉजी के युग में जानकारी आसान है, लेकिन जानकारी को विवेक और जीवन-मूल्य में बदलने का काम शिक्षक ही करता है। शिक्षक दीपक की तरह है, जो स्वयं जलकर दूसरों को रोशनी देता है। एक दीपक से दूसरा दीपक जलने पर पहले की रोशनी कम नहीं होती, वैसे ही ज्ञान बांटने से घटता नहीं, बढ़ता है।






