8 May 2026

ओखलकांडा, नैनीताल स्थित PHC में चिकित्सा उपकरणों का वितरण, जयंती केयर्स एवं हिमालय उन्नति मिशन – आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने की पहल

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नैनीताल।
आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना के 45वां वर्ष पूर्ण होने तथा इसके संस्थापक आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्मदिन के शुभ अवसर पर, जयंती केयर्स एवं हिमालय उन्नति मिशन – श्री श्री ग्रामीण विकास कार्यक्रम ट्रस्ट, आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में 08 मई 2026 शुक्रवार को ओखलकांडा, नैनीताल स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र – ओखलकांडा हेतु चिकित्सा उपकरणों का वितरण किया गया।
इस पहल का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना एवं स्थानीय समुदायों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में विशेष रुप से रेशमा टंडन (स्टेट एपेक्स मैंबर व संयोजक – वी. डी. एस.), आर्ट ऑफ लिविंग), श्री जितेन्द्र साहनी (भू. पू. संयोजक – एपेक्स व आई. ए. एच. वी.), आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षकगण ज्योति मेहरा, सुनीता वर्मा एवं पी. एच. सी. ओखलकाण्डा की चिकित्सा अधिकारी डाॅ अंजलि व स्वास्थ्यकर्मी तथा हिमालय उन्नति मिशन के समुदाय समन्वयक प्रकाश पचवाड़ी एवं स्थानीय सज्जन आदि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर हिमालय उन्नति मिशन के प्रोग्राम डायरेक्टर अमित मेहता ने कहा कि यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में समग्र एवं समुदाय आधारित विकास को बढ़ावा देने हेतु संचालित “मॉडल लैंडस्केप डेवलपमेंट प्रोग्राम” के अंतर्गत की गई है। उन्होंने बताया कि इस सहयोग से पी. एच. सी. ओखलकाण्डा द्वारा सेवित लगभग 48,000+ जनसंख्या जिसमें, 8000+ परिवारों, 75+ गांवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने आगे कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों के समग्र विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ही सतत एवं प्रभावी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
इस अवसर पर पी. एच. सी. ओखलकांडा की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अंजलि सहित सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने हिमालय उन्नति मिशन एवं जयंती केयर्स के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपलब्ध कराए गए चिकित्सा उपकरण पी. एच. सी. ओखलकांडा की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं एवं अधोसंरचना को सशक्त बनाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अतिथियों एवं स्थानीय समुदाय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्वतीय क्षेत्रों में जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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